कबीर के दोहे मन के हारे हार है, मन के जीते जीत कहे कबीर गुरु पाइये, मन ही के परतीत..!! अर्थ : इस दोहे में कबीर यह समझाना चाहते है कि आपके मन की शक्ति ही आपका जीत या हार सुनिश्चित करती है। यदि आप मन से उत्साह पूर्वक जीत का अनुभव करते हैं, तो अवश्य ही आपकी जीत होगी। और …
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